सूर्य कुंड चित्रकूट
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| surya kund |
सूर्य कुंड यह तीर्थ चित्रकूट रामघाट से 8 किमी. उत्तर दिशा की ,ओर बेड़ी पुलिया से मार्ग जाता है ।
यह आश्रम ऋषि बेखानस का था , जब भगवान त्रेता युग में चित्रकूट आते है ,उसी समय भगवान सूर्य चित्रकूट आते ,भगवान राम के दर्शन हेतु । तब सूर्य भगवान् इसी आश्रम में रुकते हे ।
अतः जब वो इस आश्रम मे अपने रथ के साथ आते है ,तब उनके ताप से यहां की शिलाएं तक पिघल जाती है । इसके प्रमाण आज भी मिलते है।
इसी आश्रम के पास ही एक कुंड भी जिसे हम सूर्यकुंड के नाम से जानते है ।
और इस कुंड की मान्यता यह है कि इस कुंड की लंबाई अनंत है । यही कारण है कि ,यहां मंदाकिनी नदी पश्चिममुखी हो कर प्रवाह करती हैं।
माना जाता है , कि इस कुंड में स्नान करने से वह प्राणी सूर्य लोक को जाता है ।
श्लोक -
सूर्य कुण्डे नरः स्नात्वा सूर्य लोकं सगच्छति ।
सूर्य कुण्डे नरः स्नात्वा सूर्य लोकं सगच्छति ।
तस्यैव निकटे विप्र कन्या तीर्थ विराजते॥

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