बसंत पंचमी उत्सव
यह दिन वसंत के आगमन की तैयारी का प्रतीक है। इसे सरस्वती पूजा के अवसर के रूप में भी जाना जाता है। इस त्योहार का उत्सव विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में भिन्न भिन्न होता है।इसे होली के त्यौहार के ४० दिन पहले मनाया जाता है !
वसंत पंचमी हर साल माघ की पंचमी ,(हिंदू कैलेंडर महीने) को मनाया जाता है । यह आमतौर पर जनवरी के अंत या फरवरी के आसपास होता है। वसंत ऋतु को प्रायः सभी ऋतुओं का राजा कहा जाता है। यह त्योहार वसंत पंचमी के 40 दिनों के बाद अपनी तैयारी को पूरा करता है।
वसंत पंचमी का त्योहार हिंदू धर्म में एक विशेष महत्व रखता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत में बड़े उल्लास से की जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण कर पूजा-अर्चना करती हैं। पूरे साल को जिन छः मौसमों में बाँटा गया है, उनमें वसंत लोगों का मनचाहा मौसम है।
वसंत पंचमी का इतिहास
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा को इस ब्रह्मांड के निर्माता के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि वह अपनी रचना को अपनी आँखों से देखना चाहता था और इसलिए एक यात्रा पर निकल पड़ा। हालांकि, वह पृथ्वी पर मौन और अकेलेपन से निराश था। फिर उसने अपने हाथों में वीणा के साथ एक दूत को अपनी शक्तियों के साथ प्रकट किया और उससे कुछ खेलने के लिए अनुरोध किया। स्वर्गदूत ने अपनी आवाज़ से पृथ्वी पर लोगों को आशीर्वाद देने के लिए बाध्य किया। उस स्वर्गदूत को देवी सरस्वती या वीणा वादिनी के नाम से जाना जाने लगा। यहां वसंत पंचमी महत्व पर एक नजर है।
वसंत पंचमी को समृद्धि के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। क्योकि आज ही के दिन से शादी के लिए ,नए काम को सुरु करने के लिए ,या किसी भी प्रकार का शुभ कार्य सुरु करने के लिए,सर्वप्रथम माँ सरस्वती की पूजा करके ,वा आशीर्वाद लेकर ही प्रारम्भ किया जाता है ! यह दिन कृषि क्षेत्र में सरसों की फसल के पीले फूलों के पकने के लिए भी मनाया जाता है। रंग पीला देवी सरस्वती का पसंदीदा रंग माना जाता है। इसलिए, पीला दिन के उत्सव और सजावट का एक प्रमुख हिस्सा है।
🌏🌏जय चित्रकूट धाम🌏🌏

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